जीना तो आ गया

मुझ पर उधार रहेगा किस्मत तेरा 
साँसों के बिन ज़िंदा रहना जो आ गया। 
कोशिश तो की मगर जीते नहीं 
ज़िन्दगी से हारकर भी जीना तो आ गया।

इस लम्हे आकर रुक ही गयी 
बुझते अरमानों की वो बहती नदी 
असलियत की आग ने सुलगा दिया जिसे 
साँस लेते हुए भी मरना तो आ गया।

बस एक बार मैंने उड़ान भरी
तारों से गुज़रती वो आशाएँ मेरी 
ज़मीन पर गिरे जैसे हो कोई कटी पतंग 
आसमान को देख आँहें भरना तो आ गया।

यूँ तो रूह झुलसी बस इसी आग में 
मन जो डूब गया इस गहरे दाग में 
कैसे चुका पाऊँगा यह एहसान वक़्त तेरा 
उम्मीद करने से भी डरना जो आ गया।

चाहे चलता रहे ठोकरों का सिलसिला 
ज़हन में नहीं रखे कभी भी कोई गिला 
इतने वक़्त में और कुछ हो ना हो 
आख़िर खुद को माफ़ करना तो आ गया।

ज़िन्दगी से हारकर भी जीना तो आ गया।
ज़िन्दगी से हारकर भी जीना तो आ गया।